🔌 ऑन-ग्रिड, हाइब्रिड और ऑफ-ग्रिड: कौन-सा सिस्टम चुनें?
तीनों में फ़र्क, खर्च और किसके लिए कौन-सा सही है।
सोलर सिस्टम तीन तरह के होते हैं। सही चुनाव इस पर निर्भर करता है कि आपके यहाँ बिजली कितनी कटती है और आपका बजट क्या है।
| ऑन-ग्रिड | हाइब्रिड | ऑफ-ग्रिड | |
|---|---|---|---|
| बिजली कंपनी से जुड़ा? | हाँ | हाँ | नहीं |
| बैटरी | नहीं चाहिए | चाहिए | ज़रूरी |
| सब्सिडी (घर) | मिल सकती है | नियमों पर निर्भर (सर्वे में बताएँगे) | आमतौर पर नहीं |
| खर्च | सबसे कम | बीच का | सबसे ज़्यादा |
| बिजली कटने पर | सोलर भी बंद | घर चलता रहेगा | घर चलता रहेगा |
| किसके लिए | जहाँ कटौती कम हो | जहाँ कटौती ज़्यादा हो | जहाँ बिजली कंपनी की लाइन नहीं |
ऑन-ग्रिड
सबसे आम और सबसे सस्ता। दिन में सोलर से घर चलता है, ज़्यादा बिजली ग्रिड में जाती है, रात में ग्रिड से लेते हैं। नेट मीटर से हिसाब होता है। घरेलू सब्सिडी इसी पर मिलती है।
हाइब्रिड
ऑन-ग्रिड जैसा, पर साथ में बैटरी। बिजली जाने पर बैटरी से घर चलता है। जिन इलाकों में कटौती बहुत होती है, वहाँ अच्छा विकल्प है, पर बैटरी की वजह से खर्च बढ़ता है।
ऑफ-ग्रिड
पूरी तरह बैटरी पर चलने वाला सिस्टम। खेत, फार्महाउस या जहाँ ग्रिड नहीं है, वहाँ के लिए। बैटरी बड़ी लगती है, इसलिए यह सबसे महँगा है।
हमारी सलाह
अगर बिजली कभी-कभार ही जाती है तो ऑन-ग्रिड लें और सब्सिडी का पूरा फ़ायदा उठाएँ। रोज़ की कटौती है, या घर में मरीज़/ऑनलाइन काम जैसी ज़रूरत है, तो हाइब्रिड पर विचार करें। साइट सर्वे में हम आपकी असली ज़रूरत देखकर बताते हैं — ज़रूरत से ज़्यादा बैटरी बेचने का कोई फ़ायदा नहीं।