🏠 घर की छत पर सोलर (रूफटॉप)
बिजली का बिल 70–90% तक कम। केंद्र + यूपी सब्सिडी के साथ।
रूफटॉप सोलर में आपकी छत पर पैनल लगते हैं, जो दिन में बिजली बनाते हैं। बनी हुई बिजली पहले आपके घर में खर्च होती है और बची हुई बिजली नेट मीटर के ज़रिए ग्रिड में जाती है, जिसका क्रेडिट आपके बिल में घट जाता है। सही साइज़ का सिस्टम लगे तो बिल 70–90% तक कम हो सकता है।
कितने kW का सिस्टम चाहिए?
| महीने का बिल (लगभग) | सिस्टम साइज़ | छत की जगह |
|---|---|---|
| ₹1,000–1,500 | 1–2 kW | 100–200 वर्ग फुट |
| ₹1,500–2,500 | 2–3 kW | 200–300 वर्ग फुट |
| ₹2,500–4,000 | 3–4 kW | 300–400 वर्ग फुट |
| ₹4,000–8,000 | 5–6 kW | 500–600 वर्ग फुट |
1 kW के लिए आमतौर पर 80–100 वर्ग फुट छाया-मुक्त जगह चाहिए। अपना सटीक साइज़ कैलकुलेटर से देखें।
खर्च और सब्सिडी
3 kW सिस्टम की अनुमानित कीमत ₹1.8–2.1 लाख है (अक्टूबर 2026, सब्सिडी से पहले)। शर्तें पूरी होने पर केंद्र और राज्य मिलाकर ₹1,08,000 तक सब्सिडी मिल सकती है, यानी सब्सिडी के बाद अनुमानित खर्च ₹72,000 से ₹1.02 लाख। पूरा हिसाब सब्सिडी पेज पर है।
कैसे लगता है?
- फ्री साइट सर्वे — छत की दिशा, छाया, मज़बूती और बिजली का बिल देखा जाता है।
- डिज़ाइन और कोटेशन — साइज़, ब्रांड के विकल्प और पूरा खर्च लिखित में।
- सब्सिडी आवेदन और इंस्टॉलेशन — पोर्टल पर आवेदन, स्ट्रक्चर और पैनल की फिटिंग।
- नेट मीटर और चालू — बिजली कंपनी का निरीक्षण, मीटर और सिस्टम चालू।
लगवाने से पहले ध्यान रखें
- छत पर दिन में 9 से 4 बजे तक छाया न पड़े (पानी की टंकी, ऊँचा पड़ोसी मकान, पेड़)।
- छत मज़बूत हो; टीन/एस्बेस्टस की छत पर अलग स्ट्रक्चर लगता है।
- सब्सिडी के लिए बिजली कनेक्शन आपके नाम पर और घरेलू (रेजिडेंशियल) होना चाहिए।
- पैनल भारत में बने (DCR) हों, वरना सब्सिडी नहीं मिलेगी।
- बिजली कटौती में सोलर अपने-आप बंद हो जाता है (सुरक्षा के लिए)। बैकअप चाहिए तो बैटरी वाला सिस्टम देखें।